Meri Gali ke Log


मेरी गली के कुछ लोग
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मेरी गली के कुछ लोग
तुम्हे याद करते है
सुबह हो या शाम
वो तुम्हे आवाज़ लगाते है
कहें के हर दिल में तू रहता है
खुद ही जोर-जोर से चिल्लाते है
किसी ने कभी देखा नहीं तुम्हे
मगर दीदार की सब में खवाइश है

यह इसक नहीं अस्सान
यह इसकी अजमाइश है
हर जगह अगर आवास है तेरा
तुम्हे यह बी दिखा होगा
तेरी याद में किसी ने
यह ख़त बी लिखा होगा
यह जो मोहब्बत है, येही मेरी इब्बाद्दत है
इस्सी को हम सुबह शाम करते है
मेरी गली के कुछ लोग बी तुम्हे याद करते है.
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8 Responses to Meri Gali ke Log

  1. Rajbir Singh says:

    Wow gr8 babyon…

  2. fabulous poem nirmal. if i am not wrong, you are talking about God in this poem, right? devotion and love are so very alike!

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